गुवाहाटी ।

पूर्वोत्तर राज्य असम में मूसलाधार बारिश और बाढ़ का कहर जारी है। अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं राज्य के 11 जिलों के दो लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं दूसरी तरफ भारी बारिश के बाद अब भूस्खलन का खतरा भी बढ़ चुका है। ऐसे में कामरूप जिला प्रशासन ने 365 क्षेत्रों को चिन्हित किया है, जहां भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। 



भूस्खलन से हुई एक की मौत

इन इलाकों पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। वहीं भूस्खलन की एक घटना में मारे गए शख्स की पहचान नारायण साहा के रूप में हुई है। उनका घर पहाड़ पर एक बड़े पत्थर के नीचे बना था। घर पर पत्थर गिरने से उनकी मौत हो गई, जबकि बाकी परिजन बच गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वहीं, जिला प्रशासन अधिकारी 19 पहाड़ी इलाकों पर बसे घरों से लोगों को निकालने के काम में जुट गए हैं। 



खुदाई-ब्लास्टिंग पर रोक

प्रशासन ने बताया है कि करीब 200 घरों को इसे लेकर मॉनसून से पहले ही निर्देश दे दिए गए थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि कितने घरों ने निर्देशों का पालन किया है। उधर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पहाड़ों पर खुदाई और ब्लास्टिंग के काम को रोक दिया गया है। जिन गतिविधियों की इजाजत पहले दे दी गई थी, उन्हें भी जारी रखने से रोक दिया गया है। सरकार ने फिलहाल संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी है। हालांकि, लोगों को निकाला नहीं जा रहा है। सरकार के सामने एक समस्या यह भी है कि पहाड़ों पर बसे लोग वहां से जाना नहीं चाहते हैं। उनमें से ज्यादातर रोजगार की तलाश में यहां पहुंचे थे। इन लोगों से सरकार कई बार आमने-सामने आ चुकी है, लेकिन अब उसका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है।