अगरतला। ।

भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की त्रिपुरा इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी करने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो के सदस्य मणिक सरकार पर सोमवार को निशाना साधते हुए उन पर अपने 20 वर्षों के शासन के दौरान भ्रष्टाचार तथा कुप्रबंधन में लिप्त रहने का आरोप लगाया।




भाजपा प्रदेश समिति के प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्जी ने मणिक सरकार पर मतदाताओं केा गुमराह करने के लिए विकृत तथ्यों के साथ प्रधानमंत्री और भाजपा के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि माकपा नेता अपने उम्मीदवारों के लिए अभियान नहीं कर रहे हैं और कांग्रेस के भ्रष्ट शासन का अभार प्रकट कर रहे हैं और उस व्यवस्था को वापस लाना चाहते हैं।



सरकार ने कल वेस्ट त्रिपुरा में वाम मोर्चे के उम्मीदवार के लिए वोट मांगने के दौरान श्री मोदी और भाजपा पर असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने और चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पिछले पांच वर्षों में स्वतंत्र भारत में बेरोजगारी सबसे अधिक बढ़ी है।




गरीब लोगों ने अपने आय के स्रोत खो दिये हैं और देश ने मोदी जी के शासन में लोकतांत्रिक संघवाद की संस्कृति खो दिया है। इस चुनाव में मतदाता उनसे जवाब मांग रहे हैं। उन्होंने कहा, 'भाजपा ने कभी भी गरीबों का ख्याल नहीं किया है। उन्होंने युवाओं, किसानों और समाज में हाशिए पर खड़े तबकों से जुड़े मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया। भाजपा को विकास में काई रुचि नहीं है और अब वह झूठ फैला रही है क्योंकि यह समय मतदाताओं से सामने करने का है। बड़े पैमाने पर असहिष्णुता है और लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है तथा लोकतांत्रिक ढांचा ध्वस्त हो गया है।'



सरकार ने मतदाताओं से केंद्र में नरेंद्र मोदी के शासन को उखाड़ फेेंकने के लिए हाथ मिलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने बैंक खाता में 15 लाख रुपये जमा करने , त्रिपुरा में सामाजिक पेंशन 2,000 रुपये बढ़ाने और हर वर्ष कम से कम दो करोड़ नौकरियों का निर्माण करने का वादा कर निर्दोष मतदाताओं को धोखा दिया है।



वास्तव में पिछले पांच वर्षों में कुछ करोड़ पेशेवरों ने अपनी नौकरियां खो दी हैं और कई महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई हैं। उन्होंने त्रिपुरा में भाजपा-आईपीएफटी सरकार की आलोचना करते हुये कहा, 'वे आकर्षक वादों के साथ सत्ता में आये थे और पिछले एक वर्ष में भाजपा ने बड़-बड़े वादों और ङ्क्षहसा के अलावा कुछ नहीं किया। कानून का कोई शासन नहीं है और सत्ता में पार्टी की विफलता के कारण प्रशासन ठप्प हो गया है।'



भट्टाचार्जी ने सरकार के आरोपों को खारिज करते हुये कहा कि वह अपना अतीत भूल गये हैं। उनके शासन में त्रिपुरा अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी का अड्डा बन गया, शैक्षणिक संस्थान को कार्यकर्ताओं के कोचिंग केंद्र में बदल दिया गया, नौकरी का अधिकार विशेष रूप से उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को दिया गया, प्रशासन उनकी सहायता से भ्रष्टाचार का सूचक बन गया, अपराधियों और माफियाओं के लिए पुलिस थाने सौदेबाजी के केंद्र में बदल गये और राज्य महिलाओं पर अत्याचार के लिए पहचाना जाने लगा।



उन्होंने कहा, 'बिप्लब देब सरकार के 365 दिनों में शासन में पारदर्शिता लाने के लिए जनता की भलाई के मद्देनजर 256 निर्णय लिये गये। सरकार 12,000 करोड़ रुपये के रिण और 7.5 लाख की बेरोजगारी के समय सत्ता में आयी थी। जब वर्ष 1993 में यहां कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की सहायता से सरकार बनी थी तब यह कर्ज कुछ हजार ही थे। भाजपा-आईपीएफटी सरकार के एक वर्ष के शासन में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का एक भी उदाहरण नहीं मिला है और अवैध कारोबार और माफिया गतिविधियों में शामिल कार्यकर्ता अब बेरोजगार हो गये हैं।'



भट्टाचार्जी ने दावा किया कि मोदी बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे और अगला संसद माकपा मुक्त होगी। उन्होंने कहा, 'अब मणिक सरकार और उनकी पार्टी कांग्रेस के प्रति अपने भरोसे को साबित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। माकपा चुनाव में अपमानजनक हार से बचने की कोशिश कर रही है।'