नई दिल्ली/गंगटोक। ।

सिक्किम की राजनीति में दो दशक से अधिक समय दबदबा कायम रखने वाले सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने राज्य की एकमात्र लोकसभा सीट पर मौजूदा सांसद प्रेम दास राय पर एक बार फिर दांव लगाया है जिनके सामने कोई खास चुनौती नहीं है। चीन, नेपाल और भूटान की अंतरराष्ट्रीय सीमा को छूती हुई यह लोकसभा क्षेत्र से राय तीसरी बार चुनाव मैदान में उतर रहे हैं।




राज्य के मुख्यमंत्री एवं एसडीएफ के अध्यक्ष पवन कुमार चामलिंग ने राय पर भरोसा जताया है। चामलिंग स्वयं छठी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए राज्य विधानसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। कांग्रेस ने सिक्किम लोक सभा सीट से भरत बेसनेस को चुनाव मैदान में उतारा है।



राज्य में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए 11 अप्रैल को मतदान होगा। राज्य में सत्तारुढ़ एसडीएफ ने सार्वभौमिक न्यूनतम आय देने की घोषणा की है । लोकसभा चुनावों में सिक्किम नेशनल पार्टी और हम्रो सिक्किम पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं।



परंपरागत तौर पर सिक्किम के लोग क्षेत्रीय दल को ही प्रधानता देते रहे हैं। भारतीय फुटबाल टीम के पूर्व कप्तान वैचुंग भूटिया की हम्रो सिक्किम पार्टी राय को टक्कर देने के लिए अन्य दलों के साथ तालमेल करने के प्रयास में हैं। एसडीएफ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में गठित पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन में शामिल है लेकिन उसने लोकसभा चुनावों में अकेले उतरने का फैसला किया है।




नागरिकता विधेयक 2019 को खुला विरोध करने से चर्चा में आयी नेशनल पीपुल्स पार्टी भी लोकसभा चुनाव में उतर रही है। सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने की घोषणा की है। इस संसदीय क्षेत्र में कुल तीन लाख 70 हजार 65 मतदाता है जिनमें से एक लाख 79 हजार 650 महिलायें और एक लाख 90 हजार 415 पुरूष हैं। राज्य की कुल आबादी छह लाख 10 हजार छह सौ हैं जिसमें से 25 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं।



सिक्किम का भारत संघ में 16 मई 1975 को विलय हुआ और उसके बाद लंबे समय तक राज्य की राजनीति में कांग्रेस और सिक्किम जनता परिषद छायी रही। राज्य में पहली बार 1977 में हुये लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के छत्र बहादुर छेत्री को विजय हासिल हुई। वर्ष 1980 के संसदीय चुनावों में इस सीट पर सिक्किम जनता परिषद का कब्जा हो गया और उसकी उम्मीदवार पहल मान सुब्बा की जीत हुई।




वर्ष 1984 इस सीट से नर बहादुर भंडारी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुए। एक वर्ष बाद 1985 में हुये उपचुनाव में इस सीट पहली बार किसी महिला उम्मीदवार दिल कुमारी भंडारी ने सिक्किम संग्राम परिषद के टिकट पर जीत दर्ज की। अगले दो संसदीय चुनावों में भी यह सीट सिक्किम संग्राम परिषद के पास बनी रही और 1989 में नंदू थापा तथा 1991 में दिल कुमारी भंडारी संसद पहुंची। वर्ष 1996 में सिक्किम में राजनीतिक माहौल बदला और एसडीएफ ने राज्य की राजनीति में वर्चस्व कायम किया। तब से लेकर अब तक इस सीट उसका कब्जा बना हुआ जो अभी तक बना हुआ है।



वर्ष 1996, 1998 और 1999 में भीम दहल ने लोकसभा में सिक्किम का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2004 में एसडीएफ के टिकट पर नकुल दास लोकसभा पहुंचे। पिछले दो लोकसभा चुनाव में इसी पार्टी से श्री प्रेम दास राय चुनाव जीते हैं और तीसरी बार भी किस्मत अजमा रहे हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के टेकनाथ ढकाल दूसरे, भाजपा के नर बहादुर खाटीवाडा तीसरे और कांग्रेस के आकार धोज ङ्क्षनबू चौथे स्थान पर रहे थे। राज्य में कुल 29 राजनीतिक दल पंजीकृत हैं जिनमें से तीन राष्ट्रीय, दो राज्य स्तरीय और शेष गैर मान्यता प्राप्त हैं।