लोकसभा चुनाव \खत्म होते ही आपको महंगी बिजली का झटका लग सकता है। बिजली कंपनियां दरें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं और उन्हें बस चुनाव खत्म होने का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव बाद बिजली की दरों में 5-10 फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। दरअसल, घाटे की वजह से बिजली कंपनियों पर दबाव बना हुआ है। चुनाव की वजह से कई राज्यों ने दरें नहीं बढ़ाई है।



उदय स्कीम के तहत सालाना दरें बढ़ाना जरूरी है, जिससे बिजली बनाने वाली कंपनियों को भी फायदा होगा। पावर मंत्रालय चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रहा है। चुनाव बाद पावर मिनिस्ट्री वित्तीय हालत में सुधार के लिए बनाएगा दबाव दरें बढ़ाने से डिस्कॉम की हालात में सुधार होगा। वितरण कंपनियों के हालात में सुधार से जेनरेशन कंपनियों को फायदा होगा। 




घाटे से उबारने के लिए सरकार सख्त रवैया अपनाएगी। इस दबाव से ग्राहकों की भी मुश्किलें बढ़ेंगी। 20 राज्यों ने बिजली वितरण घाटे के लक्ष्य को अब तक पूरा नहीं किया। मार्च 2019 तक 15 फीसदी बिजली वितरण घाटे के लक्ष्य को हासिल करना था।