अगरतला ।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन और कमलनाथ सरकार के बीच महापौर के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर 'तनातनी' और बढ़ गई है। इस मामले में हरियाणा और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी भी अब 'कूद' पड़े हैं। पूर्व राज्यपाल सोलंकी ने इस पूरे मसले पर न केवल मध्य प्रदेश के राज्यपाल टंडन का पक्ष लिया है, बल्कि टंडन के कदम पर सवाल खड़ा करने वाले कांग्रेसियों को संकेतों में आड़े हाथ भी लिया है।



बता दें, कमलनाथ सरकार ने पिछले सप्ताह निर्णय किया था कि मध्य प्रदेश में अब महापौर सीधे जनता के बीच से नहीं चुने जायेंगे। महापौर को अब पार्षद  चुनेंगे। ज्ञात हो कि सूबे में अगले साल स्थानीय निकायों का चुनाव होना हैं।



राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराये जाने को लेकर तैयारियाँ शुरू कर चुका है। महापौर चुनाव की प्रक्रिया से जुड़ा अध्यादेश लटक जाने से आयोग की तैयारियों को धक्का लगा है। मध्य प्रदेश में 16 नगर निगम हैं। फ़िलहाल सभी निगमों में भाजपा के महापौर हैं। इन्हें सीधे जनता ने चुनकर शहर का पहला नागरिक यानी महापौर निर्वाचित किया है।




महापौर की चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अध्यादेश को लेकर कांग्रेस की बयानबाजी से राज्यपाल लालजी टंडन ख़ासे नाराज़ हैं। कांग्रेसियों की बयानबाजी के बाद उन्होंने अपने अधिकारों का दायरा पता कराया है।



राजभवन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सोमवार को राज्यपाल ने क़ानून के विशेषज्ञों के साथ इस पूरे मामले को लेकर एक बैठक की। बैठक में उन्होंने राजभवन द्वारा उठाये जा सकने वाले तमाम कदमों पर राय माँगी और विचार किया।



दूसरी ओर, हरियाणा और त्रिपुरा के राज्यपाल रह चुके कप्तान सिंह सोलंकी भी राजभवन के अधिकारों पर प्रश्न खड़ा किये जाने को लेकर नाराज़ हैं। उन्होंने इस पूरे मामले पर मीडिया से कहा, 'लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनता के बीच से चुनाव कराया जाना अधिक लोकतांत्रिक है।'




महापौर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कमलनाथ सरकार के अध्यादेश पर विचार के बीच कांग्रेसियों द्वारा राजभवन को राजधर्म का पालन करने की नसीहत से जुड़े सवाल के जवाब में पूर्व राज्यपाल सोलंकी ने कहा, 'संविधान का पालन करना ही राजधर्म है।' संकेतों में उन्होंने - सरकार और कांग्रेसियों को दायरा समझाते हुए यह भी कह डाला कि 'गवर्नर हेड ऑफ दी स्टेट हैं, और सीएम हेड ऑफ दी गवर्मेंट।'