गुवाहाटी। ।

पूर्वोत्तर राज्य असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने कहा है कि बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की कवायद के परिणामस्वरूप राज्य में बांग्लादेशियों के ताजा प्रवेश पर 'पूरी तरह से रोक' लग गई है।   




मुखी ने कहा कि केंद्र बांग्लादेश के साथ असम की सीमा को पूरी तरह से सील करने पर कार्य में तेजी ला रहा है और सीमा के नदी वाले हिस्से को भी जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक निगरानी में लाया जाएगा। इससे देश में किसी भी अवैध प्रवेश पर रोक लगेगी। मुखी ने कहा, 'एनआरसी के चलते बांग्लादेश से अवैध प्रवेश पूरी तरह से रुक गया है। यह एनआरसी प्रक्रिया की सबसे बड़ी उपलब्धि है। सरकार असम में रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान करने को प्रतिबद्ध है।'




गत वर्ष जुलाई में असम ने एनआरसी का एक मसौदा जारी किया था। इस सूची में करीब 40 लाख लोगों को शामिल नहीं किया गया था जिससे इस पूर्वोत्तर राज्य के कई हिस्सों में व्यापक प्रदर्शन हुए हैं। हालांकि, प्राधिकारियों ने एक प्रक्रिया शुरू की है जिसके तहत उन लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने का एक मौका दिया गया जिन्हें एनआरसी में शामिल नहीं किया गया है।   




असम के निवासियों को अपने नाम एनआरसी में शामिल कराने के लिए कुछ विशिष्ट दस्तावेज पेश करने होंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध के दौरान लाखों लोग भागकर बांग्लादेश से असम आ गए और यह उसके बाद भी जारी रहा। भारत-बांग्लादेश की सीमा से बांग्लादेशियों की घुसपैठ 1980 के दशक से ही असम के लिए एक गंभीर मुद्दा रहा है जब राज्य में एक व्यापक छात्र आंदोलन हुआ था जिसमें आंदोलनकारियों ने अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की मांग की थी।






राज्यपाल ने कहा, 'एनआरसी की कवायद के बाद किसी भी अवैध बांग्लादेशी के लिए (भारतीय) नागरिकता प्राप्त करना असंभव हो जाएगा। विदेशियों की पहचान हो चुकी है। यह एक बड़ी सफलता है।' बांग्लादेश के साथ असम की सीमा को सील करने के राजग सरकार के वादे पर मुखी ने कहा कि लगभग 93 प्रतिशत सीमा पर पहले ही बाड़ लगायी जा चुकी है और शेष हिस्से पर काम तेज गति से हो रहा है। भारत की बांग्लादेश के साथ सीमा में से 263 किलोमीटर सीमा असम के साथ लगती है जिसमें नदी क्षेत्र की सीमा भी शामिल है।   



यह पूछे जाने पर कि एनआरसी प्रक्रिया में पहचान किये गए अवैध बांग्लादेशियों के साथ क्या होगा, मुखी ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया लेकिन यह संकेत दिया कि उनमें से कुछ को वापस भेजा जा सकता है ताकि भविष्य में भारत में अवैध प्रवेश के खिलाफ कड़ा संदेश दिया जा सके। असम के राज्यपाल ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक पर कोई टिप्पणी नहीं की।