उच्चतम न्यायालय ने दोहराया कि वह असम में अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के प्रकाशन के लिए 31 जुलाई की समयसीमा नहीं बढ़ाएगा। न्यायालय ने कहा कि राज्य में एनआरसी का काम और लोकसभा चुनाव साथ-साथ हो सकते हैं। केन्द्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि राज्य में तैनात केन्द्रीय सैन्य पुलिस बल की 167 कंपनियां चुनाव ड्यूटी के लिए नहीं भेजी जाएंगी।




प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ ने कहा कि 31 जुलाई तक अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के लिए जरूरी तकनीक और जरूरी लोग उपलब्ध कराए जाएंगे। जब प्रदेश एनआरसी समन्यवक प्रतीक हजेला ने कहा कि एनआरसी के काम में लगे कुछ अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया है, तो पीठ ने कहा, हम अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के लिए 31 जुलाई 2019 तक की समयसीमा नहीं बढाएंगे। लोकसभा चुनाव और एनआरसी का काम एकसाथ चल सकता है।




इसके साथ ही केंद्र सरकार एनआरसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एनआरसी के लिए असम में तैनात किए गए सुरक्षा बल को आम चुनाव के लिए वापस नहीं लिया जाएगा। अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि गृह सचिव का निर्देश है कि 167 कंपनियां जो राज्य में तैनात की गई हैं वह बनी रहेंगी। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव के बावजूद एनआरसी ( NRC) प्रक्रिया के लिए सुरक्षा बल या स्टाफ की कमी नहीं होने दी जाएगी।