नर्इ दिल्ली/गुवाहाटी। ।

भारत विविधताओं का देश है। विभिन्न संस्कृतियों, धर्म और भाषा के लोग यहां रहते हैं और यही इस देश की खासियत है। साल भर हर दूसरे महीने यहां कोई ना कोई त्योहार आता है और पूरे में देश में फेस्टिव माहौल तैयार हो जाता है। इनमें से मकर संक्रांति देश में एक ऐसा त्योहार है जो हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस त्योहार की खासियत है कि देश के अलग-अलग राज्यों में इस दिन को अलग-अलग त्योहार की तरह मनाया जाता है। कहीं पर तिल के लड्डुओं के साथ तो कहीं पर पतंगों के साथ इसे मनाया जाता है।यहां हम आपको बता रहे हैं देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन को कैसे सेलिब्रेट किया जाता है।



असम में बिहू
असम का प्रमुख त्योहार बिहू है। इसे भोगली और मघ बिहू भी कहा जाता है। यह त्योहार लगभग एक सप्ताह तक मनाया जाता है। बच्चे और बड़े मिलकर लकड़ियों के छोटे-छोटे घर बनाते हैं जिसे मेजू और भेलाघर कहा जाता है। इन घरों में परिवार के सभी लोग इकट्ठे होते हैं और खुशियां मनाते हैं, दिलचस्प बात ये है कि अगले दिन सभी मिलकर इस घर को जला देते हैं। त्योहार यहीं नहीं खत्म होता, इसके बाद चावल और मीठे लारु (नारियल की बनी मिठाई) के साथ केक बनाया जाता है जिसे काटकर बिहू सेलिब्रेट किया जाता है।



गुजरात में उत्तरायन
यहां पर सबसे ज्यादा जो मशहूर है वह है पतंगें उड़ाना। आसमान में रंग बिरंगे पतंगों को उड़ाकर इस दिन को सेलिब्रेट किया जाता है। इसके अलावा लाजवाब डिशेज का भी चलन है। ठंड मौसम के अंत में आने वाले इस त्योहार में लोग अपने घर की छतों पर आते हैं पतंगें उड़ाते हैं।



पंजाब में लोहड़ी
आपने फिल्म देखी होगा वीर जारा..। फिल्म में पंजाब की धरती पर मनाए जाने वाले लोहड़ी त्योहार को बेहद अच्छे से फिल्माया गया है। यह त्योहार रबी फसल के पैदा होने के अवसर पर मनाया जाता है जो यहां की परंपरा है। लोहड़ी मूल शब्द लोह से बना है जिसका अर्थ होता है लाइट, प्रकाश। यही कारण है कि इस त्योहार पर लड़कियां जलाकर उसके चारों तरफ घूम-घूम कर डांस करने का रिवाज है।



तमिलनाडु में पोंगल
तमिलनाडु में पोंगल चार दिनों का त्योहार होता है। इस दिन सूर्य भगवान और धरती माता की पूजा की जाती है। यह इवेंट दूसरे दिन थाई पोंगल की तरह मनाया जाता है। इस दिन एक ग्राउंड के बीचोंबीच एक स्क्वायर पिच बनाई जाती है जहां पर सूरज की किरणें सीधी आती हों। वहां जलती हुई लकड़ियों पर एक बर्तन रखा जाता है जिसपर मीठा पोंगल बनाया जाता है। परंपरा ये है कि पोंगल बनने के बाद बर्तन से ओवरफ्लो होना चाहिए, इसके पीछे मान्यता है कि घर परिवार में सुख समृद्धि खूब आए।