बॉलीवुड की दिलकश अदाकारा श्री देवी आज हमारे बीच में नहीं है आज उनकी पुण्यतिथि है। पिछले साल 24 फरवरी को उनका निधन हो गया था। जब वे अपने भांजे की शादी में दुबई गई थी। तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह वहां से जिंदा नहीं लौटेंगी। लेकिन मरने से पहले उनकी एक आखिरी इच्छा अधूरी रह गयी है, जी हां सिक्किम में आयोजित रेड पांडा महोत्सव में हिस्सा लेने आए श्रीदेवी के पति व फिल्म निर्देशक बोनी कपूर ने कहा था कि श्रीदेवी की भी इच्छा सिक्किम आने की थी।




बोनी 18 जनवरी, 2018 में को सिक्किम आए थे। श्रीदेवी ने बोनी के सामने अपनी इच्छा के बारे में बताया था, लेकिन किसी को क्या पता था कि उनकी यह इच्छा अब कभी पूरी नहीं होगी। उन्होंने बताया था कि दिवंगत अभिनेत्री को सिक्किम की हसीन वादियों के प्रति बहुत आकर्षण था। इसके चलते बोनी कपूर की सिक्किम यात्रा के दौरान श्रीदेवी भी उनके साथ गंगटोक आना चाहती थीं, किंतु अपनी बेटी के तबियत ख़राब होने के कारण उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई थी।





सिक्किम के प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति अपने प्रेम और न आ पाने की टीस उन्होंने ट्विटर के जरिए लोगों से साझा भी की थी और कहा था कि वे जल्द ही गंगटोक आकर अपनी इच्छा पूरी करेंगी। श्रीदेवी का 24 फरवरी की रात असमय निधन हो गया। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गयी है।




श्रीदेवी को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाएगा जिन्होंने अपनी दिलकश अदाओं से दर्शकों के दिल में खास पहचान बनायी। श्रीदेवी (मूल नाम-श्रीयम्मा यंगर) का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मीनमपटी में हुआ था। उन्होंने अपने सिने करियर की शुरुआत महज चार वर्ष की उम्र में एक तमिल फिल्म से की थी। वर्ष 1976 तक श्रीदेवी ने कई दक्षिण भारतीय फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया। बतौर अभिनेत्री उन्होंने अपने करियर की शुरूआत तमिल फिल्म 'मुंदरू मुदिची' से की। वर्ष 1977 में प्रदर्शित तमिल फिल्म '16 भयानिथनिले' की व्यावसायिक सफलता के बाद श्रीदेवी स्टार अभिनेत्री बन गयी।




हिंदी फिल्मों में बतौर अभिनेत्री श्रीदेवी ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1979 में प्रदर्शित फिल्म 'सोलहवां सावन' से की लेकिन फिल्म असफल होने के बाद श्रीदेवी हिंदी फिल्म उद्योग छोड़ दक्षिण भारतीय फिल्मों की ओर लौट गयी। वर्ष 1983 में श्रीदेवी ने एक बार फिर फिल्म 'हिम्मतवाला' के जरिये हिंदी फिल्मों की ओर अपना रूख किया। फिल्म की सफलता के बाद बतौर अभिनेत्री वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गयी।




वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म 'लम्हे' श्रीदेवी के सिने करियर की अहम फिल्मों में शुमार की जाती है। इस फिल्म में उन्हें एकबार फिर से निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा के साथ काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म में अपने श्रीदेवी ने मां और बेटी के रूप में दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म में चुलबुले अंदाज से श्रीदेवी ने दर्शको का दिल जीत लिया। वर्ष 1992 में प्रदर्शित फिल्म 'खुदागवाह' में श्रीदेवी दोहरी भूमिका में दिखाई दी। यूं तो पूरी फिल्म अमिताभ बच्चन के इर्द गिर्द घूमती थी लेकिन श्रीदेवी ने अपनी दोहरी भूमिका से दर्शको के दिलों पर अपने अभिनय की छाप छोड दी।




वर्ष 1996 में निर्माता-निर्देशक बोनी कपूर के साथ शादी करने के बाद श्रीदेवी ने फिल्मों में काम करना काफी हद तक कम कर दिया। वर्ष 1997 में प्रदर्शित फिल्म 'जुदाई' बतौर अभिनेत्री श्रीदेवी के सिने करियर की अंतिम महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में उनके अभिनय का नया रूप देखने को मिला। फिल्म इंडस्ट्री के रूपहले पर्दे पर श्रीदेवी की जोड़ी सदाबहार अभिनेता जितेन्द्र के साथ भी खूब जमी। जितेन्द्र के अलावा उनकी जोड़ी अभिनेता अनिल कपूर के साथ भी काफी पसंद की गयी। श्रीदेवी ने अपने तीन दशक लंबे सिने करियर में लगभग 200 फिल्मों में काम किया।




उन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा तेलुगु, तमिल और मलयालम फिल्मों में भी काम किया है। श्रीदेवी ने वर्ष 2012 में प्रदर्शित फिल्म इंग्लिश विंग्लिश से कमबैक किया। फिल्म में उन्होंने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष 2013 में श्रीदेवी को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। वर्ष 2017 में उन्होंने फिल्म मॉम से एक बार फिर कमबैक किया जिसमें उन्होंने एक बार फिर से अपने लाजवाब अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। श्रीदेवी की 24 फरवरी 2018 को दुबई के एक होटल में दुर्घटनावश बाथटब में डूब जाने से मौत हो गयी।