त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव ने शनिवार को रुद्रसागर में आयोजित एक कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के बीच बत्तख के बच्चों का वितरण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री और उनकी टीम ने नीरमहल झील में कई बत्तखों को छोड़ा। 




आपको बता दें कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री देब अपने अजीबो गरीब बयानों के लिए जाने जाते हैं। बीतों दिनों एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि जलाशयों में बत्तखों के तैरने से पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। इतना ही नहीं बिप्लब देब ने कहा था कि वो ये चाहते हैं कि सभी गांववालों को बत्तख बांटी जाए, क्योंकि बत्तख की वजह से किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। वहीं देब ने गांववालों के बीच बत्तखों के बच्चों का वितरण कर अपने वादे को भी साकार किया। हालांकि उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया में उनका खूब मजाक उड़ा था। त्रिपुरा के कृत्रिम झील रुद्रसागर में नौका दौड़ के आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री बिप्लव देब ने कहा था कि झील के किनारे रहने वाले मछुआरों को 50 हजार बत्तखों के बच्चे बांटे जाएंगे। जब बत्तख पानी में तैरती हैं तो जलाशय में ऑक्सीजन का स्तर अपने आप बढ़ जाता है। इससे ऑक्सीजन रिसाइकिल होता है। पानी में रहने वाली मछलियों को ज्यादा ऑक्सीजन मिलता है। इस तरह मछलियां तेजी से बढ़ती हैं और ऑर्गनिक तरीके से मत्स्यपालन को बढ़ावा मिलता है। 




वहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि मुख्यमंत्री बिप्लव देब की इन बातों का वैज्ञानिक आधार भी है। इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन के वैज्ञानिक ए देबबर्मा ने बताया है कि मत्स्य पालन के साथ बत्तख पालन इंटीग्रेटेड फार्मिंग का हिस्सा है। बत्तख के पानी में तैरने से ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है और मछलियों को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है, जिससे उनकी बढ़वार अच्छी होती है। बत्तख का मल तालाब में जाता है, इससे भी मछलियों की वृद्धि होती है। यह कई अध्ययनों के जरिये साबित हुआ है।