आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौके पर हम आपको असम की सनसनी हिमा दास से मिलवाने जा रहे हैं। एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर इतिहास रचने वाली हिमा दास देश के लिए अब रोल मॉडल बनी हैं। हिमा ने महज दो साल पहले ही रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा था। उससे पहले उन्हें अच्छे जूते भी नसीब नहीं थे। परिवार के 6 बच्चों में सबसे छोटी हिमा पहले लडक़ों के साथ पिता के धान के खेतों में फुटबॉल खेलती थीं। सस्ते स्पाइक्स पहनकर जब इंटर डिस्ट्रिक्ट की 100 और 200 मीटर रेस में हिमा ने गोल्ड जीता तो कोच निपुन दास भी हैरान रह गए। वह हिमा को गांव से 140 किलोमीटर दूर गुवाहाटी ले आए, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्स के स्पाइक्स पहनने को मिले। 




इसके बाद हिमा ने पीछे मुडक़र नहीं देखा। हिमा का जन्म असम के नौगांव जिले के छोटे से गांव कांदुलिमारी के किसान परिवार में हुआ। हिमा के पड़ोसी ने बताया कि वह सिर्फ वल्र्ड क्लास की ऐथलीट नहीं बल्कि वह अपने आसपास हो रही बुराईयों के खिलाफ आवाज उठाना भी जानती हैं। पड़ोसी ने एक समाचार पत्र को बताया कि उनके गांव में शराब की दुकानें थी, जिन्हें हिमा ने लोगों के साथ मिलकर ध्वस्त करवाया था। पडोसी ने बताया कि वह लडक़ी कुछ भी कर सकती है। वह गलत के खिलाफ बोलने से नहीं डरतीं। वह हमारे और देश के लिए रोल मॉडल बन चुकी है। वहां के लोग हिमा को ढिंग एक्सप्रेस कहते हैं। हिमा के पिता रंजीत दास के पास महज दो बीघा जमीन है जबकि मां जुनाली घरेलू महिला हैं। जमीन का यह छोटा सा टुकड़ा ही दास परिवार के 6 सदस्यों की रोजी रोटी का जरिया है। रंजीत दास ने बताया कि मेडल जीतने के बाद हिमा ने उन्हें फोन करके कहा कि जब आप लोग सो रहे थे, तब मैंने इतिहास रच दिया। इस पर हम लोगों ने उसे बताया कि कोई नहीं सोया था और सब जागकर टीवी पर उसकी रेस ही देख रहे थे। यह सुनकर हिमा भावुक हो गईं और रोने लगी। 52 साल  के रंजीत बताते हैं कि वह अपनी बेटी का साहस देखकर हैरान रह जाते थे। उन्होंने कहा, वह बिल्कुल पर्वत की तरह सख्त है। मुझे गांव से बाहर उसे अकेले ट्रेन में भेजने में डर लगता था लेकिन वह कहती थी चिंता मत करो। इसे देखकर मुझे प्रेरणा मिलती थी। महज 18 साल की हिमा ने एआईएफएफ-अंडर 20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता है। वह महिला और पुरुष दोनों ही वर्गों में ट्रैक इंवेट में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बन गई है। बता दें कि फिनलैंड में 13 जुलाई को हिमा दास ने एआईएफएफ अंडर-20 की 400 मीटर रेस के फाइनल में 51.46 सेकेंड का समय निकालते हुए भारत को ट्रैक इवेंट इतिहास का पहला गोल्ड मेडल दिला दिया था। हिमा दास की कहानी देश की हर लडक़ी के लिए प्रेरणास्रोत है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद हिम्मत न हारते हुए कामयाबी कैसे हासिल की जाती है।